political express

Just another weblog

10 Posts

41 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 6310 postid : 30

हिन्दुओं को चाहिए सम्पूर्ण आरक्षण....

Posted On: 20 Feb, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

संसार में इस्लाम ही एक ऐसा मजहब है जिसके अनुयायी कभी संतुष्ट नहीं हो सकते. जितना उनको मिला है उससे और अधिक प्राप्त करना.,उससे और अधिक प्राप्त करना,ज्यादा से ज्यादा प्राप्त करना, और सारी दुनिया को इस्लाम के रंग में रंगना, ये उनका, प्रत्येक मुसलमान का जन्मजात उद्देश्य है, ध्येय है, लक्ष्य है, स्वभाव है. और पैगम्बर नबी ने उनको ये आदेश दिए हैं, कि हर तरीके से सारी दुनिया में इस्लाम को फैलाओ. और इस आधार पर सारा संसार जो गैर इस्लामिक है, उसको इस्लाम के रंग में कैसे रंगा जाए, यही उनका दैनिक कार्यक्रम, दिन को, रात को, चौबीसों घंटे, हर मुसलमान, जो सच्चा मुसलमान है वो यही सोचता है. इस स्थिति में यदि कोई राजनैतिक दल या कोई राजनैतिक नेता ये अनुभव करता है कि देश के मुसलमान संतुष्ट हो जाएंगे, तो वे कभी भी संतुष्ट नहीं होंगे. वे अगर संतुष्ट होते तो देश के टुकड़े नहीं होते, पाकिस्तान नहीं बनता. गांधीजी ने फार्मूला पेश किया था कि मुहम्मद अली जिन्नाह को हम देश का राष्ट्रपति बना देते हैं, अथवा प्रधानमन्त्री बना देते हैं, दोनों पदों में से जो उसे पसंद हो, और हिंदुस्तान अखंड रहने दिया जाए. लेकिन किसी भी कीमत पर जिन्नाह राजी नहीं हुआ. परिणामस्वरूप जो मारकाट हुई जो रक्त से रंग दिया गया पंजाब को, सिंध को, बंगाल को और मारकाट के बल पर, खून खच्चर के बल पर, धौंसपट्टी से, आतंकवाद के बल पर पाकिस्तान का जन्म हुआ है. आतंकवाद जिस पाकिस्तान का जन्मदाता है, उस पाकिस्तान से ये उम्मीद करना कि वो कभी शान्ति के मार्ग पर चलेगा या प्रेम या बंधुत्व के रास्ते को अपनाएगा, ये मूर्खता है. पराकाष्ठा की मूर्खता है. और 1947 में केवल मजहब के आधार पर जिन लोगों ने अपना “हक”, ,,जो कि नहीं था, लेकिन हक न होते हुए भी जिन्होंने “तथाकथित हक” ले लिया. .. तो उस कम्युनिटी के तो किसी भी आदमी को भारत में किसी भी प्रकार का रिजर्वेशन या आरक्षण मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. .. .. .”नैतिक अधिकार”. . .. … यदि नैतिकता में कोई कम्युनिटी विश्वास करती है-तो. और अगर नैतिकता पर ही किसी का भरोसा नहीं है तो अनैतिकता कि तो कोई सीमा होती ही नहीं है. आखिर किस आधार पर आरक्षण की मांग मुसलमान करते हैं, और सोचते हैं कि उनको आरक्षण दिया जाना चाहिए? और फिर, उनका जो समर्थन करता है, वो किसी भी राजनैतिक पार्टी का हो. उसको हम कभी भी देशभक्त नहीं मान सकते. ‘तीन करोड़ मुसलमान केवल’विभाजन के बाद भारत में रह गए थे. जिन्ना ने कहा था कि इन तीन करोड़ को भी पाकिस्तान आ जाना चाहिए और पाकिस्तान से जितने हिन्दू हैं उनको हिन्दुस्थान चले जाना चाहिए. यह अत्यंत प्रमाणिक बात है. नितांत अप्रमाणिक पाकिस्तान का जन्मदाता एक प्रमाणिक बात कह रहा था. उसने जिंदगी में ईमानदारी की बात अगर “कोई” कही तो यही कही. मैं अपने शब्दों में बोल रहा हूँ-कि बेईमानी के आधार पर बना हुआ जो पाकिस्तान था उसको बनवाने वाले यदि ईमानदार होते तो उनको भारत में एक क्षण भी नहीं रहना चाहिए था, पाकिस्तान चले जाना चाहिए था. और वहां के हिन्दुओं को ’सुरक्षा’ के साथ यहाँ भेज देना चाहिए था. लेकिन उनको तो धक्के मार के, तबाह करके, एकदम नोच कर के अमानवीय अत्याचारों के बल पर उनको तो वहां से खदेड़ दिया गया. और आज जो बचे-खुचे मूर्ख या अभागे हिन्दू जो वहां पर पड़े हैं, उनकी जो दशा है, वो सारा संसार जानता है. भारत में तीन करोड़ मुसलमान जो गांधीजी की मूर्खता एवं कायरता के कारण यहाँ पर रह गए थे, वो आज पैंसठ वर्षों में बढ़कर के तेईस-चौबीस करोड़ हो गए हैं. पच्चीस करोड़ भी हो गए हों तो आश्चर्य की बात नहीं है. और दूसरा ये ध्यान रखना चाहिये कि पाकिस्तान का जन्मदाता उत्तर प्रदेश है. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में है. और पाकिस्तान की डिमांड करने वाले सारे चाहे वो अल्लामा इकबाल हों, या बरेल वाले चाहे देवबंद वाले सब के सब उत्तर प्रदेश की उपज हैं. .. यू पी के मुसलमान को ‘क्या नहीं मिला’ जिसके लिए वो छटपटाता रहा है. हकीक़त ये है कि हिन्दुस्थान हिन्दुओं का देश होना चाहिए “था”. जब पाकिस्तान मुसलमानों का देश है, तो हिन्दुस्थान हिन्दुओं का देश क्यों नहीं होना चाहिए था? ?? ???ये बेईमानी की पराकाष्ठा है, कि पाकिस्तान तो मुसलमानों का देश है, लेकिन हिन्दुस्थान हिन्दुओं का देश नहीं है. ये धर्मशाला है, सराय है. होटल में भी कम से कम, फीस तो दी जाती है, किराया तो दिया जाता है, भाडा तो दिया जाता है. यहाँ तो वो भी नहीं है. और सारे संसार में आतंकवाद को कौन फैला रहा है? ?? इस्लाम के अलावा कौन है, आतंकवाद का जन्मदाता? ?? ये पूछा जाना चाहिए, उन लोगों से जो आरक्षण की मांग कर रहे हैं. और बिना किसी आरक्षण के फकरूद्दीन अली अहमद, जाकिर हुसैन साहब और अपवाद के रूप में देशभक्त प्रोफ़ेसर ऐ पी जे अब्दुल कलाम, जो भारत के सर्वोच्च पदों पर उपराष्ट्रपति पद पर, राष्ट्रपति पद पर, सर्वोच्च न्यायाधीश के पद पर, ऐसा कौन सा पद है? ?? मुख्यमंत्री का, गवर्नर का जिसपर बिना आरक्षण मुसलमान ना पहुंचे हों. और जितनी मलाई, मलाई नहीं कहना चाहिए जितना बेईमानी का कबाब और कोरमा इन्होने खाया है, बिना आरक्षण के, और हिन्दुओं को तो रूखा सूखा सत्तू भी नहीं मिल रहा है. ये बेईमानी की पराकाष्ठा है. ये जो सलमान खुर्शीद साहब हैं, ये किस मुहँ से आरक्षण की मांग कर रहे हैं? ?? लोकतंत्र की जो जड़ है चुनाव आयोग, उसको चुनौती देना और कांग्रेस की बेशर्मी की पराकाष्ठा है कि इतनी बड़ी हिमाक़त को वो केवल हजम ही नहीं कर रही है, बल्कि उसकी पीठ थपथपाई जा रही है. अब बेनी प्रसाद जी उतर आये हैं. तो बेनी प्रसाद जी और ऐसे जितने भी प्रसाद जी हों, मुलायम सिंह हों या उनके उत्तराधिकारी हो और सब के सब लोगों के वामपंथी, दक्षिणपंथी हों जितने भी दल हैं भारत में, उनके सारे नेताओं को समझना चाहिए कि कितना भी आरक्षण दे दिया जाए, मुसलमान जब तक खुश नहीं होगा, जब तक कि सो कॉल्ड धर्मनिरपेक्ष नेता खतना करवा के, अपनी सुन्नत करवा कर के, जब तक इस्लाम क़ुबूल नहीं कर लेंगे, तब तक भारत का ही नहीं, संसार का कोई मुसलमान संतुष्ट होने वाला नहीं है. ये मृगमरीचिका और ये वोटलोलुपता है जिसके कारण वोट प्राप्त करने के लिए देश को जो लोग बेचने की कोशिश कर रहे हैं उनको देशभक्त कहा जाए या क्या जाए, ये देश की प्रबुद्ध जनता को, देश के विवेकशील नागरिकों को ये तय करना चाहिए. तो मुझे, केवल में ही नहीं सारे संसार भर के देशभक्त भारत संतानें इसके लिए व्यथित हैं, बहुत ज्यादा व्यथित और व्याकुल हैं. और अब क्या किया जाए पूरे के पूरे कुँए में शराब घुली हुई है. सुप्रीम कोर्ट का लॉयर कह रहा है, कि कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए, और उसको ईमानदारी के जो शिरोमणि हैं, नगाड़ा बजाने वाले, अन्ना हजारे जी, वो उसको अपने सर पर पगड़ी के समान सर पर बांधे नाचते हुए फिर रहे हैं, सब जगह. कश्मीर के अस्तित्व के मामले में जो जनमत संग्रह की मांग करता है तो ऐसे ढोंगियों से, ऐसे धूर्तों से पूछा जाना चाहिए, कि कहाँ कहाँ जनमत संग्रह करवाओगे मियां? ?? “आज”अगर उत्तर प्रदेश में जनमत संग्रह करवा लिया जाए तो पूरा उत्तर प्रदेश पाकिस्तान में चला जाएगा. केरल में जनमत संग्रह करवाओगे या आसाम में करवाओगे या बंगाल में करवाओगे? कितने पाकिस्तान और बनवाने हैं? ? तो हिन्दुओं को क्या करना चाहिए? ?? हिन्द महासागर में डूब कर मर जाना चाहिए क्या? ?एक ईसाई फैमिली बिना किसी आरक्षण के. .. … …. .. … ईसाई कितने हैं? मुसलमानों कि तुलना में बहुत नगण्य हैं, उन्होंने अभी तक आरक्षण की मांग नहीं की है,लेकिन विदाउट आरक्षण के एक वर्णसंकर परिवार, उन्नीस सौ सैंतालीस ले कर के अब तक. .. … एक ईसाई, क्रिश्चियन परिवार, उस क्रिश्चियन परिवार के सारे सदस्य डंके की चोट पर ईसाई हैं. हमारी प्रियंका जी जो हैं. पता नहीं क्यों प्रियंका नाम अब तक उन्होंने बर्दाश्त कर रखा है. ““”लेकिन उनके पतिदेव रॉबर्ट वाड्रा हैं” “”. एक अरब हिन्दुओं में सोनिया जी को जंवाई बनाने के लिए कोई हिन्दू नहीं मिला? ?? ??? जो हिन्दू सोनियाजी को अपने माथे पर बैठा कर नाच रहे हैं, उस कम्युनिटी में मतलब एक भी, एक भी बंदा, एक भी योग्य पात्र, जो प्रियंका जी का पाणिग्रहण कर सके तो उनके पति रॉबर्ट भी ईसाई हैं, और उनके पुत्र और पुत्री, जिनको ले कर के फिर रही हैं, सब जगह मतदाताओं के मन में करुणा उत्पन्न करने के लिए, उनके भी हिन्दू नाम नहीं हैं ना? वो भी क्रिश्चियन हैं ना? उन्होंने भी बपतिस्मा ले रखा है ना? तो ये बिना किसी आरक्षण के हो रहा है. वेटिकन सिटी देश पर राज्य कर रही है. विदाउट ऐनी रिजर्वेशन. इस देश में हिन्दुओं के अतिरिक्त जो भी लोग हैं उनको किसी प्रकार का आरक्षण कभी, किसी सपने में भी नहीं मिलना चाहिए, और अगर मिलना चाहिए तो केवल हिन्दुओं को आरक्षण मिलना चाहिए, और वो आरक्षण ये होना चाहिए-
“कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और अफगानिस्तान की सीमा से लेकर बर्मा की सीमा तक जो सम्पूर्ण भारतवर्ष है, वो हिन्दुओं का देश है”. ..बाकी लोगों को, जो इस तर्क में इस सिद्धांत पर विश्वास नहीं करते उनको जहाँ जाना हो,जहाँ उनको बढ़िया चिकन बिरयानी मिल रही हो, और जहाँ उनको बहुत ज्यादा सुविधाएं मिल रही हों, उनको वहां चले जाना चाहिए. इसमें क्या दिक्कत है? अगर यहाँ बहुत ज्यादा अन्याय हो रहा है, तो तशरीफ़ ले जाईये ना. .. … किसने रोका है? ?? कौन सा बैरियर, कौन सा बैरिकेड लगा हुआ है? ??इसलिए इस पाखण्ड का जितनी जल्दी हो सके, इसका पर्दाफाश किया जाए. और जब तक हिन्दू अपने अधिकारों को नहीं समझेंगे और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए नहीं खड़े होंगे तब तक हिन्द महासागर के अलावा और कोई रास्ता उनको डूब मरने के लिए मिलने वाला नहीं है, इस सारे षड्यंत्र का एक ही उद्देश्य है-कि- –हिन्दुओं जाओ चूंकि तुम हिन्दू हो, काफिर हो इसलिए तुमको दुनिया में “कहीं भी” जीने का कोई हक नहीं है, एक भी देश नहीं है,जहाँ तुम रह सको….

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sumit के द्वारा
February 20, 2012

अच्छा लेख , परन्तु अब आरक्षण ख़तम हो जाना चाइये सब के लिए ………….. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/02/18/हिंदुस्तान-vs-इंडिया/


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran