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...इतना बड़ा धोखा तो अंग्रेजो ने भी नहीं किया

Posted On: 19 Nov, 2011 Others में

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भारत की राष्ट्रप्रेमी जनता से इतना बड़ा धोखा तो अंग्रेजो ने भी नहीं किया था अब काले धन के बारे में देश की जनता को कोई जानकारी नहीं दी ज़ा सकेगी-
१- कांग्रेस ने अन्तराष्ट्रीय भ्रष्टाचार समझौते को दो साल बाद बहुत हिला हवाली के बाद हस्ताक्षर किया.
२- इसे लागु करने की सहमति इन्होने २०११ में दी स्वामी रामदेव जी के आन्दोलन के बाद और वादे के बावजूद काले धन को “राष्ट्रीय संपत्ति” घोषित नहीं किया, क्योकि भारत के राष्ट्रीय सम्पत्ति को कोई देश अपने यहाँ नहीं रख सकता है……
३-इस बीच ए कांग्रेसी करीब ७० देशो दे शातिराना अंदाज़ में दोहरे कराधान की संधि कर डाले हैं और आगे भी करते ज़ा रहे है जिससे की भारत की जनता को सिर्फ अप्रैल-२०१२ के बाद के ही पैसे का लेन देन जानने का हक़ होगा यानि पहले का कला धन कहा है, किसका है, कैसे कमाया, कितना है, जनता नहीं जान पायेगी और विदेशी बैंक इस समझौते का हवाला देकर जानकारी देने से बच जायेगे.
४-अडवानी लोगो को बेवकूफ बना रहे हैं, नहीं तो इसपर हंगामा खड़ा देते और भारत की जनता साथ देगी, लेकिन लगता है उनका भी पैसा विदेश में जमा है…
५- काले धन पर सिर्फ स्वामी राम देवजी ही लगे है और उनका आन्दोलन असर भी दिखाना शुरू कर चूका है और जनवरी-२०१२ में एक बड़ा आन्दोलन शुरू होने ज़ा रहा है जिसमे सभी नौजवानों को बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना होगा.
६-सर्कार जानबूझ कर नौजवानों का ध्यान उधर से हटा कर रखती है, कभी क्रिकेट में कभी सेरियल में, अन्ना जी भी एक बार भी काले धन को नहीं उधृत नहीं किया.
७-न्यूज चैनलों पर इतना पैनल चर्चा होती है लेकिन कभी काले धन पर कोई चर्चा नहीं किये, इसका मतलब क्या है क्योंकि शायद वे भी काले धन से चलते है…..
८-सोनिया और राहुल ने कभी भी काले धन पर कोई विचार नहीं दिया और कभी देंगे भी नहीं…..
९- सरकार तो भ्रष्टाचार पर तो नौटंकी कर रही है लेकिन काले धन पर लोगो को सिर्फ गुमराह कर रही है क्योकि यह काला धन ४००,००,००० करोड़ से भी कही ज्यादा है.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Piyush Kumar Pant के द्वारा
November 20, 2011

सुरेन्द्र जी…….. आपके कई कथनो से सहत हूँ ….. पर एक विषय पर आप भ्रमित हैं…… आप भी कई और लोगों की भांति कहते हैं की अन्ना जी भी एक बार भी काले धन को नहीं उधृत नहीं किया……….. पर विचारणीय प्रश्न ये है की जब बाबा रामदेव इस विषय पर पहले से ही जन जागृति मे लगे थे तो ऐसे मे अन्ना का इस विषय को उठाना कहाँ तक उचित था…… कई लोगों ने अन्ना के इस आंदोलन को बाबा रामदेव के आंदोलन की धार को कुंद करने का प्रयास मात्र बताया…… तो क्या अगर अन्ना काले धन की बात उठाते तो वही लोग अन्ना को बाबा रामदेव का मुद्दा हाईजैक करने का दोषी नहीं बताते……….

akraktale के द्वारा
November 19, 2011

श्रीमानजी शर्मिन्दा ना करें क्योंकि हमारे हाथ में पांच वर्षों में एक बार वोट देने के सिवा कुछ नहीं है.हां हमारे कदम कभी रामदेव जी या फिर कभी अन्ना जी के पीछे चल पड़ते हैं किन्तु जैसे ही वे लोग बैठते हैं हमारे कदम भी घर को लौट आते हैं और जबान कैंची की तरह चलने लगती है. सब जानते है किसका पैसा विदेशों में जमा है और अब क्या जमा और क्या ना जमा, सब रफा दफा हो चुका है क़ानून की बात कुछ दिन पहले आदरणीय ओ पी परिक जी ने उठायी थी मगर उनके उस आलेख पर यदि प्रतिक्रियाएं भी देखि जाएँ तो शायद मेरे एक हाथ की उँगलियों से भी कम ही होंगी. अब इस देश में इसे आप धोका कहो या कुछ भी कहो ऐसा ही चलता रहेगा. फिर भी आपने लिखा आभार आपका.

Santosh Kumar के द्वारा
November 19, 2011

सही कहा ,..ये अंग्रेजों के बाप हैं ,…अंग्रेजों ने बहुत कम लूटा ….


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